बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

डीलरक किरदानी

डीलरक किरदानी 

गाम गाम में शोर भेल अछि , 
डीलर अछि बेईमान 
सभक मुँहे सुनि रहल छी, 
डीलर अछि शैतान
लाबै छथि राशन जनता के नाम पर
आ तुरंत विदा भ जाइत छथि दुकान पर
दूकानदार सँ कनफुसकी क' क'
दस बजे रातुक समय द' क'
सुन दलान देखि अबीह' बौआ
एकटा बड़का बोड़ा ल' क'
पाई नगद तू लेने अबीह'
दाम में नै तू घिच - पिच करिह'
कियाक त' गारिक हार हमहि पहिरै छी
जनता के श्राप हमहि लैत छी
हाकिम के घुस हमहि दैत छी
तैयो हम चोरे कहबै छी
गौंआँ के बुरबक बनाबी
अपने हम हाकिम कहाबी
सब कियो आगा पाछा करैया
घुस में पान तमाकुल दइया
तैयो हम करै छी मनमानी
ककरो कोनो बात नै मानी
दस बोड़ा हम चीनी रखने
तोरे सब के लेल
बाँकी जे दू बोड़ा बाँचत
जनता के ठकी लेब
गाम में दस टा मुँहगर कनगर
मुंह तकर हम भरबै
बाँकी सब ठाम झूठ बाजी क'
चोरी हमहि करबै
अगिला खेपी तेल आनब
तू तखनहि रहिह' सचेत
रस्ते में तू ठाढ़ रहिह' पाई टीन समेत
गाम पर अनिते देरी
भ' जाइया हेरा फेरी
मुखिया जी बदमाशी करैया
टीन झोरा ल' एतय अबैया
दस किलो चीनी आ तेल
ओकरो मंगनी देबय पड़ैया
मुदा दस किलो चीनी आ तेल पर
मुखहिया जी सकदम
टकरा बाद जे मोन करैया
करै छी अपने मन
टकरा बाद किरानी सबके
झूठ बाजी छी हमहि ठकने
लोक सब हमर किरदानी के
महीना में दस टा दैत अछि दरखास
जा गांधी (पांच सौ ) द' आफिसर के
तुरंत करा दैत छी बरखास
घुसक छैक एखन जमाना
तेन ने हम छी बनल दिबाना
चारि साल धरि कहुना कहुना
ई कोटा चलि जाएत
पाँचम साल बुझह
सीमेंट जोड़ी दू तल्ला पिटायत
बेसी तोरा की कहिय'
एहि में घर बैसल बड्ड नफ्फा
मुदा आशीर्वाद में कखनो
घर घरायण सब सफ्फा 



(१९९२ के डायरी सँ )
Sanjay Jha -
नागदह , मधुबनी ,
मिथिला ------

रविवार, 28 दिसंबर 2014

Geet

गे छौड़ी पतरकी गोरकी
एना कनखी नहि मारै....
अपन नयनक बाण नहि चलाबै
तोहर नयनक बाण बड्ड कातील
क देत हमरा घायल गे
एना कनखी नहि मारै .....
तोहर यौवन चढ़ल बसन्तक
हमर यौवन माघक मारल 
देखि तोहर पुष्पित यौवन
भ जाएत मन आकुल गे
एना कनखी नहि मारै....

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

हम तपैत दुपहरीयाक बटोही
आहाँक स्नेहक छाहैर मे
बैस किछु देर निहारब
आहाँक स्नेह आहाँक दुलार ।
हम बटोही छी
आहाँ चिर स्थिर वट वृक्ष
हमरा सन कतेको बटोही
आहाँक स्नेहक छाहैर मे
अपन तपल ह्रदय जुड़ेने हेता ।

jingi

जिनगीक पहेली बड्ड उलझल
जतेक सुलझेबाक चेष्टा करी
ओतेक उलैझ जाइत अछि...
बुइझ नहि पबैत छी
कत' चुक भ जाइत अछि...
कखनो शांत जिनगीक गति
कखनो अनायास
ज्वार भाटा आइब जाइत अछि....
सहज रहबाक चेष्टा
नहि कोनो अपेक्षा
तथापि कखनो क
जिनगी बोझ बुइझ परैया ।।।।।

शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

जाउ आब किछु नहि कहब
जँ आहाँ सदिखन हमर ह्रदय मे रहब ।
ताइक रहल चिन्मार यौ मैथिल 
बजा रहल दलान
पेटक खातिर छोइड़ गेलौं सभ
अपन खेत खरीहान !!!!!
जँ बेटी धन कमइतै
जँ बेटी बापे घर रहितै
त नहि लोक बहइबतै नोर
बेटी के जन्म पर !!!!!!