बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

BANEBE MITHILA

सुनहो भैया सुनहो काका
चलहो अपन गाम हो,
सभ मिल जुइल बनेबै
अपन सुन्नर मिथिला धाम हो...
काहे के हम जेबै भैया
पंजाब बंगाल असाम हो,
सभ कुछ त हई अपने लंग
क लेबै जुगार हो...
जमीन हई पानी हई
हई शुद्द बसात,
ज्ञान के हई भंडार मिथिला
लगा लेबै उद्योग हो...
बिहारी बनि सुनबहोँ गाहिर
या मैथिल बनि बनबहोँ महान,
फैसला करहोँ हो भैया
आब न करहोँ वक्त नुकशान...
मिथिला राज्य निर्माण सेना
भड़ि रहल हुँकार हो,
अबहो काका अबहो भैया,
दहू मिरानिसे के संग हो..
सभ मिल जुइल बनेबै
अपन सुन्नर मिथिला धाम हो....
जय जय मिथिला जय जय मिरानिसे
 :गणेश कुमार झा "बावरा ":

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

জয়   মিথিলা, জয় মৈথিলি 

CHALU MITHILA

घुइर चलू घुइर चलू मैथिल
अपन मिथिला देश
बाट जोहै छथि माए मिथिला,
आँचर मे लऽ स्नेहक सनेश।
उजइर पुजइर गेल छै ओकर
सभटा खेत पथार
गाम घर सभ भक्क पड़ल छै
डिबिया बाती नै जरै छै
देख ई दशा
माए मिथिला के फाटै छै कुहेश ।...
जाहि धरा पर बहैत अछि
सात सात धार
आई ओहि धरा के छाती अछि सुखाएल
खाए लेल काइन रहल अछि नेन्ना भुटका
माइर रहल छथि माए मिथिला चित्कार ।
देखू देखू हे मिथिलावाशी केहन आएल काल
देब भूमि तपोभूमि
आई बनल आतंकक अड्डा
जतऽ कहियो पशु पंछियोँ वाचैत छल शास्त्र
आई ओहि धरा सँ सुना रहल अछि बम बारुदक राग ।
हे मैथिल!
दोसरक नगरी रौशन केलौँ
छोइड़ अपन देश
आबो जँ नै आएब मिथिला
तऽ भऽ जाएत मिथिला डीह 
कुहैर कुहैर क कहैथ माए मिथिला ई..
चलू चलू यौ मैथिल अपन मिथिला देश
फेर सँ बनेबै ओहने मिथिला
देखतै देश विदेश..जय मिथिला
   :गणेश कुमार झा "बावरा":

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

हम मैथिल छी बिहारी नै

'जय मिथिला '                  "क्रान्ति "                'जय मैथिली '
                                 
                      " जागू मैथिल नै त पहिचान मिट जाएत "                        
                            "  मिथिला राज्य आंदोलन"

रविवार, 29 दिसंबर 2013

KRANTI

व्यग्र अछि मन हमर,
उग्र होबे लेल आतुर अछि,
मुदा एहन संस्कार हमर,
मन हमर साधल अछि ।
मुदा, की करब राखि संस्कार,
जखन खतरा मे अछि पुरा मैथिल सभ्यता,
आब बने पड़त परशुराम...क्रांति...जय मिथिला

Jay Mithila

छोड़ि अपन देश मैथिल धेने छथि भदेश,
 गाम घर सभ सुन्न पड़ल छै,
 खेत खरिहान सभ बाट जोहैत छै,
कहिया औता मैथिल ललना,
कियाक अतेक निष्ठुर बनल छथि,
सभ किछु बिलाएल जा रहल अछि,
पहिने बिलाएल भेष फेर भाषा,
आबो आउ अपन देश,
सम्हारु जे बचल अछि अवशेष..जय मिथिला

गुरुवार, 7 नवंबर 2013

योगी

"योगी "
पहीर  चोला योगी केर हम ,
घर- द्वारि सभ  छोड़ि  देलौ
वने- वन बौएलौ
मने -मन  बौएलौ
मुदा  माया के नै छोड़ि पएलौ ।
      
            ठगि  अन्जान  इंसान  के
            हम  बेसी  धन  अरजलौ 
            स्वयं  इंसान बनि  नै सकलौ
            मुदा इंसान हमरा  भगवान बनेलक ।

बैस  मखमल  के सिंहासन पर
हैम उपदेश दैत  छी----------
"ई  संसार माया थिक
प्रभु में सभ केयो भ जाऊ लिन "!!!!!!!!!!