हे !!! हम एकौ मिसीया कम नहि छी.. जँ आहाँ चाइरटा सुनाएब , त हम चालीसा गाएब.... हे!!! जँ आहाँ बुझैत होइ , अहीँक बोली अछि बीखगर, त हमरो बोली अछि . लौँगीया मिरचाइ सन तिखगर....
रविवार, 22 जून 2014
मिथिला राज्य आन्दोलन के
भेंट रहल अछि नित्य नव आयाम
संसार में तीन तरहक वृक्ष होइत छै तीन स्वभाव के :
१. जे मात्र फूल दैत छै----जेना गुलाब
२. जे मात्र फल दैत छै ---जेना कटहर
३. जे फूल आ फल दुनू दैत छै ----जेना आम
एहि तरहे मनुष्यक सेहो स्वभाव होइत छै :
१. जे मात्र बजता करता किछु नहि
२. जे करता मुदा बजता नहि
३. जे बजता आ करता
तुलसीदास जी रामचरित मानस मे धन के तीन उपयोग बतेने छथिन :
१. उत्तम -----दान
२. मध्यम ----भोग आ
३. निचतम् ----नाश
सच जँ धन के दान आ भोग नहि काएल जाए त नाश होएत।