गुरुवार, 11 जुलाई 2013

LALKAR

मिथिला राज्य ल क रहबौ, सुनि ले पटना दिल्ली के सरकार...
बड्ड सताएला बड्ड कनौलाए, आब नै सहबौ अत्याचार...
सगरो मैथिल जागि रहल छै, माँगि रहल छै अपन अधिकार...

गुरुवार, 4 जुलाई 2013

मिथिला राज्य अपन अधिकार

"मिथिला  राज्य अपन अधिकार"
                    :एक अभियान :
जन -जन कें मन मे बैसल
मिथिला  राज्य अपन अधिकार.....
बड्ड  दिन भाँग खाए भकुएअल छलहुँ
मुदा  आब हम मैथिल जाइग  गेलहुँ ......
अछि मधुर भाषा  हमर मैथिली
अछि समृद्ध हमर साहित्य -संस्कृति
अछि ज्ञान -गंगा हमर धरोहर
मुदा, पथ -विचलीत भ गेल छलहुँ
अपन माए के आँचर सँ दूर भ गेल छलहुँ ......
आब आबि गेलहुँ
हे माए मिथिला आहाँक स्नेहक कोरा  मे ......
नैन्ना -भुटका  बड़का -छोटका
सब केओ जागि रहल अछि आब
एकहि स्वप्न सभक आंखि में
कहिया हेतहि अपन मिथिला राज्य?
कहिया अपन भाषा में पढबई?
कहिया भेटतै मान -सम्मान ?
हे मैथिल !
आब ओ दिन दूर नै
जहिया बनत मिथिला राज्य
शपथ खा चुकल छी
कफ़न बाँधि  चुकल छी
चलि चुकल छी क्रान्तिक पथ पर
बस , आहाँ सभक आशीष आ सहयोग चाही
क्रान्तिक ध्वज अविरत फहराइत रहाए
ताहि हेतु सब मैथिल के हाथ चाही .......
जय मिथिला ! जय मैथिली !!


शनिवार, 29 जून 2013

 He Mae Mithila , ham santan aahanke
kriya khaeet chhi, Matribhumi ke
gulami ke janjir sa , shighra chhoraeb ham aahanke
aab ja nai jagab ham Mae, aahan nishche ni:santan kahaeb.....

 

गुरुवार, 28 मार्च 2013

jivan

"जीवन "
जीवन ! जीवन !! जीवन !!!
चलैत  रहत  एहिना हरदम |
नेक -अनेक रंग में रंगल
जीवन के हर एक क्षण |
कखनो  हर्ष कखनो विषाद
जीवन के दुई मधुर फल |
हम यात्री छी जीवन के
यात्रा  क'  रहल  छी |
सत्य -मिथ्या मिठगर -करुगर
चित्र -विचित्र  जीवनक दृश्य सँ
साक्षात  साक्षात्कार  क' रहल छी |

   :ganesh kumar jha "bawra"

judai

तुम्हारी इस बेरुखी से अच्छा,
 तो तुम्हारी जुदाई के गम थे,
 जो कम से कम धड़कन  बन,
 सिने मे धड़कते तो थे।
थोरी देर के लिए ही सही,
लेकिन याद कर तुम्हेँ,
यादोँ की गहरी सागर मेँ,
 यादोँ के सहारे--
 तुम्हारे दिदार तो किया करते थे।
 जब से आयी हो तुम,
न जाने क्यूं- -
नजरेँ मिलाने के वजाए,
नजरेँ चुराने लगी हो तुम?
कोई मिल गया है और,
 या मुझे समझने लगी हो गैर?

रविवार, 24 मार्च 2013

खुश रहू, दन दनाइत रहू, 
जहाँ रहू, हन हनाइत रहू। 
चाहे रहू कोनो देश, चाहे धरू कोनो भेष,
 सदेव अपन माटि पानि मे सनाएल रहू।

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

Hindi kavita "DIPAK"


  1. "दीपक "
    लोग पूछ्ते है "दीपक " से
    दीपक ! तुम क्यों जलते हो ?
    दीपक , अपनी कहानी
    कुछ इस तरह ब्याँ करता है ----
    मेरा 'कर्म ' है जलना
    इसलिए, मैं जलता हूँ !
    मेरा 'धर्म ' है औरो को प्रकाश देना
    इसलिए, मैं जलता हूँ !
    आनन्द मिलता है मुझे
    ...

    जब मैं जलता हूँ ,
    क्योंकि मेरे जलने से
    औरों को जीवन मिलता है
    इसलिए, मैं जलता हूँ !
    ये तो ध्रुव सत्य है -
    जो करना है औरों का हीत
    तो करना होगा स्वयं का अहीत
    इसलिए , मैं जलता हूँ !
    परोपकारी प्रतिफल का कभी
    चाह नहीं रखता हैं ,
    अविरत , नि:स्वार्थ भाव से
    औरों की सेवा करता है
    इसलिए , मैं जलता हूँ !
    स्वयं का जीवन सब जीता है
    पर, स्वयं जल औरों को जीयाए
    वही सच्चा संत कहलाता हैं
    इसलिए, मैं जलता हूँ !
    मेरा जलना सच्चे स्नेह
    और सेवा भाव का प्रतिक है ,
    त्याग , बलिदान , परोपकार
    सेवा, कर्तव्यनिष्ठा आदि
    मेरे जीवन के अनमोल रत्न है
    इसलिए , मैं सदेव जलता हूँ !!!!!!!!!
    :गणेश कुमार झा "बावरा "
    गुवाहाटी