शनिवार, 12 अप्रैल 2014

kavita--betik pukar

"बेटीक पुकार "




ठोहि पाइर क कहैया
बेटी एहि समाज सँ
जीबअ दिअ हमरा बाबू
हम नहि छि अभागिन यौ !!




जँ मौका देबई  हमरो बाबू
हमहूँ बनबई  डॉक्टर आ कलेक्टर
करब आहाँक नाम रौशन
जीबअ दिअ हमरा बाबू यौ !!




मानलौं बेटी धन छै पराया
छोइड़ चइल जाएत घर आहाँक
मुदा इ नियम समाज बनेलक
एहि मे हमर कोन दोष यौ !! 
      : गणेश  कुमार झा "बावरा "

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

baju maithili





      "बाजू  मैथिली "
मान करू सम्मान करू 
मिथिलापुर के नाम करू 
मैथिल छि त बाजू मैथिली 
नहि मैथिली के अपमान करू !!


मैथिल भ मैथिली बाजे मे 
किया करइ छि सँकोच ??
मैथिल छि त बाजू मैथिली
मातृभाषा के सम्मान करू !!


मैथिली अपन सभक अछि धरोहर 
नहि धरोहर के त्याग करू 
मैथिल छि त बाजू मैथिली 
नहि मैथिली के अपमान करू !!
   
       :कंचन कुमारी झा 













बुधवार, 9 अप्रैल 2014

kavita: by kanchan kumari



  "की बेटी भेनाइ छै अपराध "

पुइछ रहल अछि आइ बेटी इ सवाल 
की  बेटी भेनाइ छै अपराध ??
किया बेटी के जीवन भेल बेकार 
किया बेटी के जन्म लेनाइ भेल पहाड़ 
की बेटी भेनाइ छै अपराध ??

ज बेटा जन्मे घर मे 
बाँटैत छी भइर गाम मिठाई 
ज बेटी जन्मैया 
त किया पिटैत छी माथ-कपाड़ 
की बेटी भेनाइ छै अपराध ??

घर मे त भगवती पुजैत छी 
देवी पूजा पाठ करैत छी 
त फेर किया बेटी संग दुर्यव्यवहार 
की बेटी भेनाइ छै अपराध ??

आई दहेजक लोभ मे 
समस्त समाज भेल छै ग्रस्त 
आर किछु  त  प्रगति नहि भेल 
बेटी सभ लेल भेल कष्ट 
की बेटी भेनाइ छै अपराध ??
की  बेटी भेनाइ छै अपराध ??
         :कंचन कुमारी झा :

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

kavita: Mithilawashi: kanchan kumari



    "मिथिलावाशी "
हम छि मिथिला के वासी
मैथिली हमर नाम अछि| 
जहाँ हर घर मिथिला  धाम बसइया ,
ओहिठम हमर गाम अछि| ।


जहाँ धरती फोइर सीता जी भेली
जनक नन्दनी नाम कहेली
ओहिठम हमर धाम अछि।
हम छि मिथिला के वासी
 मैथिली हमर नाम अछि|। 
जहाँ हर आँगन ओरहुल फूल खिलाइया
हर घर माँ भगवती बसइया 
ओहिठम हमर गाम अछि।
हम छि मिथिला के वासी
मैथिली हमर नाम अछि| ।
जहाँ वेद पुरान के ज्ञान  में
मिथिलापुर के नाम अछि
जहाँ विद्यापति  कोकील   कवि
मिथलापुर के शान अछि
ओहिठम हमर गाम अछि।
हम छि मिथिला के वासी
मैथिली हमर नाम अछि| ।
                 : "कंचन कुमारी झा"

सोमवार, 7 अप्रैल 2014

kavita--उताइर् फेंकू

       " उताइर् फेंकू "


तोइड़  दिअ  जाइत-पाइत केँ बन्हन केँ
उठू ठार होउ बढू आगाँ हे मैथिल संतान
थाइम लिअ हाथ बेबश-निर्धन केँ !!


छोइड़ दिअ तुच्छ स्वार्थ भावना केँ
बुझि -सुझि करू  ओ  काज हे मैथिल संतान
जाहि सँ लाभ हुआ समस्त समाज केँ !!


बिसैर जाउ भेद अपन आन केँ
जाइन लिअ पहचाइन लिअ हे मैथिल संतान
हम सभ छी संतान एकहि माए केँ !!


उताइर् फेंकू चद्दैर मिथ्या अहम् केँ
होबए दियौ सभके विकाश हे मैथिल संतान
तखने होएत कल्याण मैथिल-मैथिली-मिथिलाधाम केँ !!
      :गणेश कुमार झा "बावरा"
       गुवाहाटी
 

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

Kavita--BETI

       "बेटी "
कहिया तक दहेज के खातिर 
बेटी के चढ़तै बलिदान 
जागू जागू यौ मिथिलावाशी  
बेटी के करू सम्मान !!


बेटा के भेजी निजी स्कूल 
बेटी के सरकारी स्कूल 
बेटा लेल सोची बने डॉक्टर 
बेटी भले रहाए अनपढ़ 
जागू जागू यौ मिथिलावाशी  
जुनि करू बेटी संग ई दुर्यव्यवहार !!!


जाहि कोइख सँ  जन्मल बेटा 
ओहि कोइख सँ बेटी 
जतबा पीड़ा बेटा मे 
ओतबी पीड़ा मे बेटी 
त बताऊ यौ मिथिलावाशी 
बेटा भेल कोना अनमोल 
बेटी के नहि कोनो मोल 
देखू देखू यौ मिथिलावाशी 
केहन भेल ई अनहोर !!!!


बेटा जन्माए त करी भोज 
बेटी जन्मिते पिटी कपाड़ 
जँ केकरो लागी  गोर 
त आशिष में कहैथ बेटा होथ 
सोचू सोचू यौ मिथिलावाशी 
बेटी के प्रति किया एहन सोच !!!!!!
  :गणेश कुमार झा "बावरा"
   गुवाहाटी (09864406875)


 

 

गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

उठू बौआ भेलै भोर
चिड़ियाँ चुनमुन करै कलोल।
सूरजदेब मारैथ हुलकी
वायुदेब करैथ प्रणाम।।