सोमवार, 15 फ़रवरी 2016
शनिवार, 13 फ़रवरी 2016
माँ भारती
कण-कणमे हमरा बसल
मातृभूमिके प्रेम छै
मातृभूमिके रक्षा खातिर
न्यौछावर हमर प्राण छै
जय माँ भारती
जय माँ भारती !!!!
तीन रंगमे रांगल
तिरंगा हमर शान छै
तिरंगाक आन-बान खातिर
न्यौछावर हमर प्राण छै
जय माँ भारती
जय माँ भारती !!!!
अनेकतामे एकता
माँ भारतीक पहचान छै
माँ भारतीक अखंडताक खातिर
न्यौछावर हमर प्राण छै
जय माँ भारती
जय माँ भारती !!!!
:गणेश मैथिल:
मातृभूमिके प्रेम छै
मातृभूमिके रक्षा खातिर
न्यौछावर हमर प्राण छै
जय माँ भारती
जय माँ भारती !!!!
तीन रंगमे रांगल
तिरंगा हमर शान छै
तिरंगाक आन-बान खातिर
न्यौछावर हमर प्राण छै
जय माँ भारती
जय माँ भारती !!!!
अनेकतामे एकता
माँ भारतीक पहचान छै
माँ भारतीक अखंडताक खातिर
न्यौछावर हमर प्राण छै
जय माँ भारती
जय माँ भारती !!!!
:गणेश मैथिल:
बुधवार, 16 दिसंबर 2015
फेर सँ चढ़ि रहल अछि
हमरा ऊपर हुनकर प्रेमक रंग,
पाकल केश देख बुझाएल
लैद गेल हमर यौवनक दिन,
बुझाए लागल अछि जे
संसारक भागम भागमे
हेरा गेल अछि कतौ
हमर दूनु ठोरक मुस्की ,
मुदा आई त गजब भ गेलै
हमर ह्रदयमे उठलै यौवनक तरंग
देख हुनकर वाएह मुस्कीत रुप,
फेर सँ हम यौवनक सागरमे
लगाबऽ लगलौंहाँ गोता
ताकि रहल छी यौवनक हीरा-मोती!!
:गणेश मैथिल
हमरा ऊपर हुनकर प्रेमक रंग,
पाकल केश देख बुझाएल
लैद गेल हमर यौवनक दिन,
बुझाए लागल अछि जे
संसारक भागम भागमे
हेरा गेल अछि कतौ
हमर दूनु ठोरक मुस्की ,
मुदा आई त गजब भ गेलै
हमर ह्रदयमे उठलै यौवनक तरंग
देख हुनकर वाएह मुस्कीत रुप,
फेर सँ हम यौवनक सागरमे
लगाबऽ लगलौंहाँ गोता
ताकि रहल छी यौवनक हीरा-मोती!!
:गणेश मैथिल
सोमवार, 16 नवंबर 2015
रुसल किए छी
"रुसल किए छी "
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
आहाँक मिठगर
कोयलीक सन बोल सुनए लेल
हमर कान अछि व्याकुल
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
आहाँ जँ एना
चुप भऽ बैसब
गाल फुला कऽ
हमरा नहि टोकब
त कोना कऽ
चलत प्रेमक गाड़ी
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
आहाँ जँ मुस्की, त हम घुसकी
आहाँ जँ हँसी, त हम फँसी
जँ आहाँ नहि बाजी
त हम धप खसी
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
अहीं त छी हमर लजबन्ती
अहीं पर प्राण हमर न्यौछावर
बिनु आहाँ हमर जिनगी
जेना--
सुर बिनु संगीत
सुगन्ध बिनु फुल
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
:©गणेश मैथिल
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
आहाँक मिठगर
कोयलीक सन बोल सुनए लेल
हमर कान अछि व्याकुल
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
आहाँ जँ एना
चुप भऽ बैसब
गाल फुला कऽ
हमरा नहि टोकब
त कोना कऽ
चलत प्रेमक गाड़ी
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
आहाँ जँ मुस्की, त हम घुसकी
आहाँ जँ हँसी, त हम फँसी
जँ आहाँ नहि बाजी
त हम धप खसी
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
अहीं त छी हमर लजबन्ती
अहीं पर प्राण हमर न्यौछावर
बिनु आहाँ हमर जिनगी
जेना--
सुर बिनु संगीत
सुगन्ध बिनु फुल
आहाँ बाजू ने बाजू
रुसल किए छी ?
चुप बैसल आहाँ
नहि निक लागै छी !!
:©गणेश मैथिल
रविवार, 15 नवंबर 2015
निर्मोही पिया"
"निर्मोही पिया"
सखी हेऽ
हमरा नहि आई तूं रोकिहऽ
जँ पिया नहि आई एता
त हम खाऽ लेब माहुर !
पिया बड्ड निर्मोही निर्दयी भेलाऽ
हमरा प्रेमक पाठ पढा कऽ
अपने ओरीया देश चलि गेलाऽ
ओ ओरीया देश जा कऽ
कोनो सौतनीक फेराऽ मे पड़ि
हमरा निछौह बिसैर गेलाऽ
हमरा एतऽ बिरहाक आगिमे
जरै लेल छोड़ि गेलाऽ !
सखी हेऽ
की कहिअऽ व्यथा अपन
किछु नहि सुझैया
किछु नहि फुराइया
किछु नहि निक लगैया !
सखी हेऽ
फागुनक बसात मन जरबैया
सावनक बरशात देह जरबैया
पुशक जाऽर थड़-थड़ कपबैया
अहुरीया काटि हम राति बितबै छी
बिरहनि बनि हम दिन बितबै छी
सदिखन हुनके हम बाट जोहैत छी
हुनक योगीन बनि हम
नित्य नब आश बुनै छी !
सखी हेऽ
तूंही कहऽ
कतेक दिन हम धिरज राखू ?
कतेक दिन हम बिरहाक आगिमे
भुस्सा जेना नहुँ नहुँ जरू ??
:©गणेश मैथिल
14/10/2003
सखी हेऽ
हमरा नहि आई तूं रोकिहऽ
जँ पिया नहि आई एता
त हम खाऽ लेब माहुर !
पिया बड्ड निर्मोही निर्दयी भेलाऽ
हमरा प्रेमक पाठ पढा कऽ
अपने ओरीया देश चलि गेलाऽ
ओ ओरीया देश जा कऽ
कोनो सौतनीक फेराऽ मे पड़ि
हमरा निछौह बिसैर गेलाऽ
हमरा एतऽ बिरहाक आगिमे
जरै लेल छोड़ि गेलाऽ !
सखी हेऽ
की कहिअऽ व्यथा अपन
किछु नहि सुझैया
किछु नहि फुराइया
किछु नहि निक लगैया !
सखी हेऽ
फागुनक बसात मन जरबैया
सावनक बरशात देह जरबैया
पुशक जाऽर थड़-थड़ कपबैया
अहुरीया काटि हम राति बितबै छी
बिरहनि बनि हम दिन बितबै छी
सदिखन हुनके हम बाट जोहैत छी
हुनक योगीन बनि हम
नित्य नब आश बुनै छी !
सखी हेऽ
तूंही कहऽ
कतेक दिन हम धिरज राखू ?
कतेक दिन हम बिरहाक आगिमे
भुस्सा जेना नहुँ नहुँ जरू ??
:©गणेश मैथिल
14/10/2003
शनिवार, 14 नवंबर 2015
भूत
भूत
रौ भूत
आब तू किएक छें परेशान ?
बड्ड मन लागल छलौं
अपन घर छोड़ि
मनुखक्क घरमे बास करबाक !
की तोरा बुझल नहि छलौं ?
तूं त मात्र शोणीत चुसैत छें
मुदा, ई ईंटके देवालमे रहे वाला मनुख
मांस तकि डकैर जाइत छै !!
रौ भूत
आब तू किएक छें परेशान ?
बड्ड मन लागल छलौं
अपन घर छोड़ि
मनुखक्क घरमे बास करबाक !
की तोरा बुझल नहि छलौं ?
तूं त मात्र शोणीत चुसैत छें
मुदा, ई ईंटके देवालमे रहे वाला मनुख
मांस तकि डकैर जाइत छै !!
गीत
माए:---
रौ बौआ
कोना क' बिसैर गेलहीन
अपन आँगनक दुरखा
देखहीन तोरा लेल
कानि रहल छौ अँगना
रौ बौआ
कोना क' बिसैर गेलहीन
अपन आँगनक दुरखा !!
दू पाई तूं, की कमेला
गाम घर, सब गमेला
बाट जोहै छौ अँगना
रौ बौआ
कोना क' बिसैर गेलहीन
अपन आँगनक दुरखा !!
बेटा:---
गै माए
पेटक खातीर
छोड़लौं गाम घर
पेट लागल अछि पोसीया
गै माए
कोना क' कहियो
अपन मनक दुखरा !!
मालीक अछि बड्ड कसैया
दिन राति काज कराबैया
गाम आबे लेल छी हम आतुल
मुदा, छुट्टी नहि दैया
गै माए
कोना क' कहियो
अपन मनक दुखरा !!
गै माए
जँ निके-नाके रहबौ
अगिला बरख, जरूरे एबौ
नहि कनिहाँए तूं शपत हमर
गै माए
कोना क' कहियो
अपन मनक दुखरा !!
:©गणेश मैथिल
रौ बौआ
कोना क' बिसैर गेलहीन
अपन आँगनक दुरखा
देखहीन तोरा लेल
कानि रहल छौ अँगना
रौ बौआ
कोना क' बिसैर गेलहीन
अपन आँगनक दुरखा !!
दू पाई तूं, की कमेला
गाम घर, सब गमेला
बाट जोहै छौ अँगना
रौ बौआ
कोना क' बिसैर गेलहीन
अपन आँगनक दुरखा !!
बेटा:---
गै माए
पेटक खातीर
छोड़लौं गाम घर
पेट लागल अछि पोसीया
गै माए
कोना क' कहियो
अपन मनक दुखरा !!
मालीक अछि बड्ड कसैया
दिन राति काज कराबैया
गाम आबे लेल छी हम आतुल
मुदा, छुट्टी नहि दैया
गै माए
कोना क' कहियो
अपन मनक दुखरा !!
गै माए
जँ निके-नाके रहबौ
अगिला बरख, जरूरे एबौ
नहि कनिहाँए तूं शपत हमर
गै माए
कोना क' कहियो
अपन मनक दुखरा !!
:©गणेश मैथिल
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