शनिवार, 10 सितंबर 2016

कविता: आगि-आगि

आगि-आगि
सबतरि पसरल आगि
कतौ स्वार्थक आगि
कतौ बदलाक आगि
कतौ अलगाववादक आगि
कतौ साम्प्रदायिकताक आगि
आगि-आगि
सबतरि पसरल आगि
केओ जरा' रहल अछि मन
केओ जरा' रहल अछि हृदय
केओ जरा' रहल अछि देह
केओ जरा' रहल अछि घर
केओ जरा' रहल अछि देश
सब जरि झुलैस रहल अछि
आगि-आगि
सबतरि पसरल आगि
आगिक आँच धधैक रहल अछि
भ' रहल अछि सर्वश्व स्वाह :
कतौ आगि उगैल रहल अछि बन्दुक
कतौ आगि उगैल रहल अछि तोप
पूरा विश्व आगिक चुल्हामे अछि झोंकल
पजैर सकैत अछि कखनो परमाणु युद्ध
आगि-आगि
सबतरि पसरल आगि
हे मानब जीव
जीवन भेटैत अछि एकबेर
जीवनक सुख आनन्द लिअ
मानवताक संग जीव लिअ
मिझा दिऔ स्नेहक पानि सँ
सबतरि पसरल आगि !!!
:गणेश मैथिल
गुवाहाटी

सोमवार, 18 जुलाई 2016

कविता..राम अल्लाह

आहः !
हे देव !
कतअ छ नुकाएल तूं ?
अपने स्वर्गमे राज करै छ
धरती पर मानवके लहू लुहान करै छ !!
की स्वर्गोमे तोरा आ अल्लाहमे लड़ाई होइत छ ?
हमरा जनैत तूं सब एकै छ
एकहि सूरज एकहि चन्द्रमा
पूरे जगतके इजोत केने छ ।
केयो द्वितियाक चान देख ईद मनाबै छ
केयो चौठक चान देख चौरचन मनाबै छ
केयो गंगाक पानि सँ तोरा नहाबै छ
केयो गंगाक पानि सँ अजान पढै छ
आब अल्लाह राम दूनु अवतरीत होब
अपन बनाएल सुन्नर संसारके बचाब'
नहि त सनकल मनुष नाश क देतअ !!!
:गणेश मैथिल

कविता..जिनगी फरेब थिक

सब झूठ थिक फरेब थिक
मायाक मकरजालमे फसल अछि इंसान
ओझराएल जिनगी फरीछाएब मुश्किल
एतबे उधेर बुनमे कटैत जा रहल अछि जिनगी
भीन्सरे उठि खुरपी ल
बौइनक ओरीयानमे निकैल जाइत छी
नैन्ना भुटका टकटकी लगौने रहैत अछि
बाबू लबनचुस लेने औता
अतेक गांठमे गठीएल अछि जिनगी
जे गांठके खोलहेमे ओझरा जाइत छी
नेन्ना भुटका टकटकी लगौने रहि जाइत अछि
हम बिसैर जाइत छी लायब लबनचुस ।

गुरुवार, 31 मार्च 2016

छंदक फांद तोड़ि ताड़ि
लीख रहल छी कविता आइ ।
नहि जानै छी रचब हम
दोहा, सोरठा आर चौपाई ।।
मनक भाव उकेर रहल छी
बिनु शब्दक मात्रा गनने आइ ।
कहथि कविता कवि सँ--
हम बनी जन-जनक कंठक बाणी
करु एहन कोनो उपाई ।।

शनिवार, 12 मार्च 2016

सुख शान्ति

ताकि रहल छी ओ
जे भेंट रहल अछि नहि ।
जे अछि राखल सम्मुख
तेकर कोनो कद्रे नहि ।।
वन-वन भटैक
रहल अछि मन ।
हेर रहल अछि
सुख शान्तिक क्षण ।।
जँ ठहैर एक पहर
झाँकब अपन अन्तरमन ।
ह्रदयमे बैसल भेटती शान्ति
भ जाएत सुखमय जीवन ।।
:गणेश मैथिल
गुवाहाटी

रविवार, 6 मार्च 2016

मुफ्तखोरी

जनसंख्या नियंत्रण कोना हेतै
जखन मंगनी मे सरकारी अनाज भेटतै ??
काज करबाक कोन काज
जखन राज्य मे छै मुफ्तखोरी राज ??
के चाहत बीपीएल सँ उपर उठी
बिनु काज सरकारी खजाना लूटी ??
आब जनसंख्या बढाब' मे कोन दोष
जखन खुलल छै मीड डे भोज ??
द क माइरतै भत्ते-भत्ता
नेता हथिआबै अपन सत्ता !!
देशक जनता खुश
मंगनीक चाउर मे
भलेही देशक भविष्य
जाउक चुल्हाक अंगोर मे !!
ठीके कहल गेल छै---
" धोतीवाला देहचीर कमाउक
लूंगीवाला बैसल बैसल खाउक !!"
:गणेश मैथिल
गुवाहाटी

मंगलवार, 1 मार्च 2016

"डेग-डेग चलैथ मैथिल
करैत संङगोर सभ जना,
किछु-किछु जँ सब करबै
हेतै काज महान जेना,
चहूँ दिश पसरत लालीमा
चमकत मैथिल सूर्य जेना ।। "