सोमवार, 7 अप्रैल 2014

kavita--उताइर् फेंकू

       " उताइर् फेंकू "


तोइड़  दिअ  जाइत-पाइत केँ बन्हन केँ
उठू ठार होउ बढू आगाँ हे मैथिल संतान
थाइम लिअ हाथ बेबश-निर्धन केँ !!


छोइड़ दिअ तुच्छ स्वार्थ भावना केँ
बुझि -सुझि करू  ओ  काज हे मैथिल संतान
जाहि सँ लाभ हुआ समस्त समाज केँ !!


बिसैर जाउ भेद अपन आन केँ
जाइन लिअ पहचाइन लिअ हे मैथिल संतान
हम सभ छी संतान एकहि माए केँ !!


उताइर् फेंकू चद्दैर मिथ्या अहम् केँ
होबए दियौ सभके विकाश हे मैथिल संतान
तखने होएत कल्याण मैथिल-मैथिली-मिथिलाधाम केँ !!
      :गणेश कुमार झा "बावरा"
       गुवाहाटी
 

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

Kavita--BETI

       "बेटी "
कहिया तक दहेज के खातिर 
बेटी के चढ़तै बलिदान 
जागू जागू यौ मिथिलावाशी  
बेटी के करू सम्मान !!


बेटा के भेजी निजी स्कूल 
बेटी के सरकारी स्कूल 
बेटा लेल सोची बने डॉक्टर 
बेटी भले रहाए अनपढ़ 
जागू जागू यौ मिथिलावाशी  
जुनि करू बेटी संग ई दुर्यव्यवहार !!!


जाहि कोइख सँ  जन्मल बेटा 
ओहि कोइख सँ बेटी 
जतबा पीड़ा बेटा मे 
ओतबी पीड़ा मे बेटी 
त बताऊ यौ मिथिलावाशी 
बेटा भेल कोना अनमोल 
बेटी के नहि कोनो मोल 
देखू देखू यौ मिथिलावाशी 
केहन भेल ई अनहोर !!!!


बेटा जन्माए त करी भोज 
बेटी जन्मिते पिटी कपाड़ 
जँ केकरो लागी  गोर 
त आशिष में कहैथ बेटा होथ 
सोचू सोचू यौ मिथिलावाशी 
बेटी के प्रति किया एहन सोच !!!!!!
  :गणेश कुमार झा "बावरा"
   गुवाहाटी (09864406875)


 

 

गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

उठू बौआ भेलै भोर
चिड़ियाँ चुनमुन करै कलोल।
सूरजदेब मारैथ हुलकी
वायुदेब करैथ प्रणाम।।



मंगलवार, 25 मार्च 2014

kavita---dosrak dekhauns

       "दोसरक देखाउंस "


दोसरक जँका बने चललौं
भंगइठ (बिगैर )  गेल जिनगीक सुर-ताल,
निके छलौं अपने जँका
सुखमय छल संसार।


चाल अपन जँ छोड़ब
जँ पकड़ब दोसरक राह ,
 मंजील त नहिये भेटत
भ जाएत जिनगी तबाह।

प्रकृति मौलिक थिक
प्रकृतिक सभ वस्तुक  मौलिकता ,
तहिना मन्नुखक जिनगी सेहो
सभके अपन विशिष्ठ्ता।


    :गणेश कुमार झा "बावरा "
     गुवाहाटी 

रविवार, 23 मार्च 2014

hakar

                   हकार !! हकार !! हकार !!      
 पूर्वोत्तर मैथिली साहित्य संगोष्ठी , गुवाहाटी  
अपन मासीक कार्यक्रम के तहत जुइर शीतल पाबैन के मौका पर
                                     १३-०४-२०१४ के 
                                "साहित्य -सम्मेलन "
                                 के आयोजन क रहल अछि..... 
     समय : २ बजे सॅ 
  स्थान : बद्रीदास स्कूल , कुमारपारा , गुवाहाटी 
 पूर्वोत्तर में रहनिहार मैथिल  रचनाकार आ साहित्यप्रेमी जन सँ आग्रह जे ओ सभ अपन रचना संग एहि सम्मेलन में उपस्थित होइथ।
सम्पर्क : 9864406875 , 9864126176 , 9864065553 

शुक्रवार, 21 मार्च 2014

मिथिला राज्य आंदोलन के समर्थक नेता सभ के भारी मत स विजय बना लोकसभा में भेजू मिथिलावशी, ताकी ओ सभ लोकसभा में एकजुट भ मिथिला राज्य लेल जोर सोर स अवाज उठा सकैथ, चाहे ओ कोनो पार्टी के नेता होइथ....
जय मिथिला, जय मिथिला राज्य आंदोलन , जय मिरानीसे

सोमवार, 17 मार्च 2014

पूर्वोत्तर मैथिली साहित्य संगोष्ठी  अपन पहिल कवि-सम्मेलन दिनांक १६-०३-२०१४ के बद्रीदास स्कूल में संध्या ३ स ५ आयोजीत केलक। एहि में लगभग ६० स ऊपर श्रोतागण उपस्थित छलाह। ५ टा कवि अपन कविता स कवी सम्मलेन के शोभा बढ़ेला। हर तरहक कविताक पाठ भेल।
श्रोतागण आनंदित भेला आ संगोष्ठीक कार्य के सराहना केला।
सम्मलेन के अध्यक्षता श्री कमलकांत जी केलैन।
सम्मलेन आ संगोष्ठीक आवश्यकता आ एकर आगुक उद्देश्य पर विस्तृत चर्च पूर्वोत्तर में मैथिली लेल सतत कार्य केनिहार श्री सत्यानन्द पाठक जी केलैन।
कवि -सम्मलेन के शुरुआत गणेश जीक कविता स भेल :
"फागुन "
फागुन बसंत लेलै
जीवन में उमंग एलै
नब-नब सृजन सृष्टि में भेलै !!
चारु दिश पसरल हरियरी
गन्ध पुष्पक अति मनमोहक
स्नेह रस में डूबल हृदय-मन
फागुन..............एलै !!
मौसुआएल छल मन हमर
माघक पतझड़ जेना...
लगिते बसात बसंत केँ
फुला गेलौं गुलाबक फूल जेना
फागुन . . .......... एलै !!
जिनगीक सच सेहो एहने
जेहन मौसमक रीति
आश नहि छोड़ी कखनो
चाहे हुआ कतबो समय विपरीत
कहैथ गणेश सुनू भाई श्रोता
फागुन बसंत दैथ याह संदेश
फागुन .. ………… एलै !!
आ एहि के बाद संतोष जी , ललित जी , सत्यनारायण जी आ पवन जी के एक स एक कविता स सम्मलेन आगू बढ़ैत गेल।