मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

nahi lebai dahej

बुच्चा +बुच्ची : हम मिथिला के छी नवतुरीआ
                       हम खाई छी शपथ -----
                           नहि लेबई हम दहेज़
                           नहि देबई हम दहेज़
                      चुइन लेबई अपन  संगी
                      अपन मन सँ करबई विआह !!
बुच्चा : हम नहि बिकाएब बड़द जँका
            नहि बनब हम घर घुसना
            हमहुँ छी इंसान यौ बाबू
            अछि हमरो अपन सम्मान !!


हम मिथिला के छी नवतुरीआ
  हम खाई छी शपथ -----
                           नहि लेबई हम दहेज़
                           नहि देबई हम दहेज़
                      चुइन लेबई अपन  संगी
                      अपन मन सँ करबई विआह !!
बुच्ची :हम बेटी छी त की भेलई
           अछि हमरो अपन सम्मान
           नहि किनब हम बरद यौ बाबू
           चाहे हम भइर जिनगी रहब कुँवाइर !!


हम मिथिला के छी नवतुरीआ
                       हम खाई छी शपथ -----
                           नहि लेबई हम दहेज़
                           नहि देबई हम दहेज़
                      चुइन लेबई अपन  संगी
                      अपन मन सँ करबई विआह !!
                :गणेश कुमार झ :बावरा:

BHRuN HatYa

भूण हत्य|
आई मन में एकटा विचार भेल
किया समाज खराब भेल|
जनइत अछइत में
किया करई छै ...
समाज इ अपराध,
जै मालुम छै
भूण हत्या छै महापाप||
इ कथा मिथिला समाज के सिर्फ नहि अछि,
समस्त समाज में फैलइत इ पाप अछि|
जनइत अछइत में किया करई छै समाज इ अपराध,
जै मालुम छै भूण हत्या छै महापाप||
जै बेटा रहइत त मान करई छि,
बेटी रहइता त माईर फैकइ छि|
ओइ अबोध शिशु सै कि भेल एहन अपराध,
किया करई छै समाज एहन काज,
जै मालुम छै भूण हत्या छै मयहापाप||
सीता,मीरा, लछ्मीबाई तीनों छथीन,
आदर्श,प्रेम और वीरताक देवी,
कि नहि मिलन हीनकर सभक मैया बाबू के सम्मान?
आई कौन बेटा आइब करई छथीन जनक जी के नाम,
बेटी बचाऊ अहि में अछि सभक सम्मान,
जनइत अछइत नहि करु इ अपराध,
जै मालुम अछि भूण हत्या छै महापाप||
:"कंचन कुमारी झा"
choir aahaa gelau jarait hamra,
dhadhkait premak aaig me
ham tarpait jharbait chhi nor,
hardam aahank yaad me.....

शनिवार, 12 अप्रैल 2014

kavita--betik pukar

"बेटीक पुकार "




ठोहि पाइर क कहैया
बेटी एहि समाज सँ
जीबअ दिअ हमरा बाबू
हम नहि छि अभागिन यौ !!




जँ मौका देबई  हमरो बाबू
हमहूँ बनबई  डॉक्टर आ कलेक्टर
करब आहाँक नाम रौशन
जीबअ दिअ हमरा बाबू यौ !!




मानलौं बेटी धन छै पराया
छोइड़ चइल जाएत घर आहाँक
मुदा इ नियम समाज बनेलक
एहि मे हमर कोन दोष यौ !! 
      : गणेश  कुमार झा "बावरा "

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

baju maithili





      "बाजू  मैथिली "
मान करू सम्मान करू 
मिथिलापुर के नाम करू 
मैथिल छि त बाजू मैथिली 
नहि मैथिली के अपमान करू !!


मैथिल भ मैथिली बाजे मे 
किया करइ छि सँकोच ??
मैथिल छि त बाजू मैथिली
मातृभाषा के सम्मान करू !!


मैथिली अपन सभक अछि धरोहर 
नहि धरोहर के त्याग करू 
मैथिल छि त बाजू मैथिली 
नहि मैथिली के अपमान करू !!
   
       :कंचन कुमारी झा 













बुधवार, 9 अप्रैल 2014

kavita: by kanchan kumari



  "की बेटी भेनाइ छै अपराध "

पुइछ रहल अछि आइ बेटी इ सवाल 
की  बेटी भेनाइ छै अपराध ??
किया बेटी के जीवन भेल बेकार 
किया बेटी के जन्म लेनाइ भेल पहाड़ 
की बेटी भेनाइ छै अपराध ??

ज बेटा जन्मे घर मे 
बाँटैत छी भइर गाम मिठाई 
ज बेटी जन्मैया 
त किया पिटैत छी माथ-कपाड़ 
की बेटी भेनाइ छै अपराध ??

घर मे त भगवती पुजैत छी 
देवी पूजा पाठ करैत छी 
त फेर किया बेटी संग दुर्यव्यवहार 
की बेटी भेनाइ छै अपराध ??

आई दहेजक लोभ मे 
समस्त समाज भेल छै ग्रस्त 
आर किछु  त  प्रगति नहि भेल 
बेटी सभ लेल भेल कष्ट 
की बेटी भेनाइ छै अपराध ??
की  बेटी भेनाइ छै अपराध ??
         :कंचन कुमारी झा :

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

kavita: Mithilawashi: kanchan kumari



    "मिथिलावाशी "
हम छि मिथिला के वासी
मैथिली हमर नाम अछि| 
जहाँ हर घर मिथिला  धाम बसइया ,
ओहिठम हमर गाम अछि| ।


जहाँ धरती फोइर सीता जी भेली
जनक नन्दनी नाम कहेली
ओहिठम हमर धाम अछि।
हम छि मिथिला के वासी
 मैथिली हमर नाम अछि|। 
जहाँ हर आँगन ओरहुल फूल खिलाइया
हर घर माँ भगवती बसइया 
ओहिठम हमर गाम अछि।
हम छि मिथिला के वासी
मैथिली हमर नाम अछि| ।
जहाँ वेद पुरान के ज्ञान  में
मिथिलापुर के नाम अछि
जहाँ विद्यापति  कोकील   कवि
मिथलापुर के शान अछि
ओहिठम हमर गाम अछि।
हम छि मिथिला के वासी
मैथिली हमर नाम अछि| ।
                 : "कंचन कुमारी झा"